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बॉलिवुड ऐक्टर सोनू सूद ने मुंबई स्थित घर में अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दी अपनी पिटिशन वापस ले ली है। सीजेआई शरद अरविंद बोबडे समेत कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सोनू को इसकी अनुमति दे दी। सोनू सूद ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। इसमें मुंबई के जुहू इलाके में उनकी आवासीय इमारत में कथित अवैध निर्माण को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नोटिस के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने राहत की सांस दी इसके बाद सोनू ने एक लंबा मेसेज ट्वीट किया। उन्होंने हैरिसन फोर्ड का एक कोट शेयर करते हुए लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार मुझे राहत की सांस दी और सुधारात्मक उपाय का समय दिया। निर्माण हमेशा से लीगल था। मुझे जूडिशरी पर पूरा विश्वास है और कानून का हमेशा पालन करूंगा।' कुछ लोगों के कारण करना पड़ा दिक्कतों का सामना ऐक्टर ने आगे लिखा, 'दुर्भाग्यवश, कुछ लोगों के कारण मुझे दिक्कतों का सामना करना पड़ा जो मेरी छवि खराब करना चाहते थे। मेरी सभी से अपील है कि ऐसे लोगों की डिमांड के आगे घुटने न टेकें। उनमें सेंस का भाव हो, यही प्रार्थना है। मेरी टीम को खासतौर पर धन्यवाद।' आवासीय परिसर को होटल में बदलने का मामला बता दें, सूद की याचिका में दावा किया गया था कि 13 जनवरी, 2021 के हाई कोर्ट के आदेश को महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 43 (1) के प्रावधानों पर विचार किए बिना पारित किया गया है। उनके आवासीय परिसर को एक आवासीय होटल में बदलने के लिए उनका आवेदन 2018 में संबंधित विभाग के सामने पेश किया गया था। रेनोवेशन को पहले ही रोका गया सूद और उनकी पत्नी द्वारा याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने इंटिरियर रेनोवेशन के काम को पहले ही रोक दिया है जिसके लिए महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 43 के प्रावधानों के अनुसार अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए प्रतिवादियों को इमारत में पहले से किए गए रेनोवेशन के काम को तोड़ने से रोका जा सकता है। बीएमसी ने क्या कहा था? बीएमसी के मुताबिक, सोनू ने छह मंजिला आवासीय इमारत 'शक्ति सागर' में स्ट्रक्चरल बदलाव किए हैं और जरूरी अनुमति के बिना उसे एक होटल में बदल दिया है। बीएमसी ने जुहू थाने में एक शिकायत भी दर्ज कराई थी जिसमें बिना अनुमति के आवासीय इमारत को एक होटल में कथित तौर पर बदलने के लिए सूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। पुलिस को भेजा गया था शिकायत पत्रबीएमसी ने इमारत का निरीक्षण किया था और पाया था कि सूद ने नियमों का कथित तौर पर पालन नहीं किया और पिछले साल अक्टूबर में उन्हें नोटिस दिए जाने के बाद भी अवैध निर्माण जारी रहा। इसके बाद पुलिस को शिकायत पत्र भेजा गया था। पुलिस ने अभी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है।
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