पिछले काफी समय से बॉलिवुड ऐक्टर डैनी के बेटे और की डेब्यू फिल्म '' काफी चर्चा में थी। फाइनली इस फिल्म को ऑनलाइन प्लैटफॉर्म Zee5 पर रिलीज कर दिया गया है। फिल्म में एक ऐसा मिशन दिखाया गया है जिसमें भारत की एलीट स्पेशल फोर्सेज के 5 लोग एक बच्ची की जान बचाने के मिशन में लगे हुए हैं। कहानी: भारत के एक बेहद मशहूर साइंटिस्ट जो अपने फॉर्मूले के साथ गायब हैं उनकी 6 साल की पोती के पीछे पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियां लगी हैं ताकि बच्ची के जरिए साइंटिस्ट बनर्जी से वह फॉर्म्यूला हासिल किया जा सके। बच्ची को जॉर्जिया से भारत लाने के लिए भीम राणा (रिंनजिंग डैंजोंग्पा) के साथ एक स्क्वॉड बनाया जाता है। जब तक इस बच्ची तक भारतीय स्पेशल फोर्सेज के जवान पहुंचते हैं तब तक पाकिस्तान की स्पेशल फोर्सेज इस बच्ची को अगवा कर लेती हैं। इसके बाद किस तरह 5 अधिकारियों का यह ग्रुप जान पर खेलकर इस बच्ची को भारत लेकर आता है यह पूरी फिल्म की कहानी है। रिव्यू: फिल्म शुरू होती है पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्पेशल फोर्सेज के ऑपरेशन से जिसमें भीम राणा को इंट्रोड्यूस कराया जाता है। इस मिशन में भीम एक छोटी बच्ची को बम ब्लास्ट में नहीं बचा पाता है और इसके बाद भीम नौकरी छोड़ देता है। जब साइंटिस्ट बनर्जी की पोती मिमी का पता चलता है तो इंडियन इंटेलिजेंस की ऑफिसर नंदिनी राजपूत (पूजा बत्रा) एक टीम बनाती हैं ताकि बच्ची को लाया जा सके। फिल्म का प्लॉट इंट्रेस्टिंग है और इसमें राष्ट्रवाद का मसाला जोड़कर चलाने की कोशिश की गई है। फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद लचर है और स्क्रीनप्ले उबाऊ। किसी भी सीन में आपको यह फिल्म बांधती हुई नजर नहीं आती है। फिल्म के फाइट सीन बेसिर-पैर के हैं और ऐसा लगता है कि जैसे बच्चे स्कूल में कोई प्ले कर रहे हैं। अच्छे प्लॉट और यूरोप की खूबसूरत लोकेशंस का कोई असर नहीं पड़ता है। रही-सही कसर फिल्म में बिना सिर पैर के गढ़ी गई रिनजिंग और मालविका के किरदारों की प्रेम कहानी और जबरन ठूंसे हुए गाने पूरी कर देते हैं। सबसे बड़ी बात है कि फिल्म के अंत में साइंटिस्ट बनर्जी का पता चलने की बात कही गई है यानी इसका सीक्वल भी बनाए जाने का सोचा जा रहा है। ऐक्टिंग: इस फिल्म पर रिनजिंग और मालविका के बॉलिवुड डेब्यू की बड़ी जिम्मेदारी थी जिसमें यह पूरी तरह फेल हो चुकी है। रिनजिंग की फिजिक बेहद अच्छी है और वह ऐक्शन फिल्में करने के लिए फिट भी हैं। बेहतर होता कि बॉलिवुड डेब्यू में आने से पहले वह अपने पिता डैनी से थोड़ी ऐक्टिंग भी सीखकर आते। डैनी एक ऐसे कलाकार हैं जिनका बॉलिवुड कभी पूरा इस्तेमाल नहीं कर सका मगर उन्होंने अपनी ऐक्टिंग का लोहा तो मनवाया है। पूरी फिल्म में हर सीन में रिनजिंग का चेहरा भावहीन नजर आता है और उनके डायलॉग डिलिवरी बेहद खराब है। मालविका चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर पहले ही 'कभी खुशी कभी गम' में नजर आ चुकी हैं। वह भी आधी-अधूरी तैयारी के साथ डेब्यू के लिए आ गई हैं। हालांकि इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि फिल्म में वह खूबसूरत लगी हैं। पूजा बत्रा और मोहन कपूर जैसे कलाकारों के किरदार ऐसे बनाए गए हैं जो ओवर द टॉप हैं और आपको समझ नहीं आएंगे। क्यों देखें: इस फिल्म को नहीं भी देखेंगे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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