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Monday, 15 November 2021

कभी बार टेंडर की नौकरी करते थे शाहबाज खान, बोले- मैंने रणजी ट्रॉफी का मैच भी खेला है

'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुलतान', 'चंद्रकांता', 'युग', 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' जैसे कई लोकप्रिय शोज और बिग बी, अक्षय कुमार, अजय देवगन और रितिक रोशन जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम कर चुके एक बार फिर चर्चा में हैं ओटीटी की अपनी नई सीरीज 'गेम ऑफ द सेक्सेज' से। क्रिकेट पर आधारित इस वेब सीरीज में शाहबाज खान एक कोच की भूमिका निभा रहे हैं। इस खास बातचीत में वे कई मुद्दों पर बात करते हैं। ओटीटी की लोकप्रियता को देखते हुए आप भी इस प्लैटफॉर्म पर 'गेम ऑफ द सेक्सेज' से अपना डेब्यू करने जा रहे हैं?हां, यह मेरी पहली ओटीटी सीरीज है। इस शो में मैं कोच की भूमिका निभा रहा हूं। आप तो जानती हैं कि हमारे देश में क्रिकेट को रिलिजन की तरह माना जाता है। मुझे इस शो का कॉन्सेप्ट बहुत अच्छा लगा कि इसमें महिला और पुरुष खिलाड़ियों के गेम का मिक्स्ड क्रिकेट है। इसमें मनोरंजन के साथ-साथ वुमन एम्पॉवरनमेंट और जेंडर इक्वैलिटी का जबरदस्त मेसेज देखने को मिलेगा। दीपक पांडे ने इसे बहुत ही कमाल तरीके से दर्शाया है, तो यह सीरीज क्रिकेट की दुनिया में एक गेम चेंजर भी साबित हो सकती है। ये भी हो सकता है कि आगे चलकर ऐसी टीम के बारे में सोचा जाए, जो मिक्स जेंडर टीम हो, जिसमें एक ही टीम ही विराट कोहली और मिताली राज साथ खेलते नजर आएंगे। इयोर टीवी की इस सीरीज में मैं प्रकाश नामक एक साउथ इंडियन कोच की भूमिका निभा रहा हूं। यह एक हारा हुआ कोच है, जिसे क्रिकेट बोर्ड ने हटा दिया है। किसी जमाने में यह इंडिया का नंबर वन कोच था। सीरीज की प्रोटागोनिस्ट रूमाना मुझे ढूंढती हुई आती है और क्रिकेट की कोचिंग के लिए प्रेरित करती है। उसके बाद कोच ही नहीं क्रिकेट की दुनिया में भी बहुत कुछ बदल जाता है। इसमें आपको हाई ऑक्टेन ड्रामा देखने को मिलेगा। क्या आप क्रिकेट प्रेम रखते हैं? देश में क्रिकेट के सदाबहार मौसम के चलते इस शो को उसका कितना फायदा मिलेगा?मैं जब कॉलेज में था, तब क्रिकेट का दीवाना था। खूब क्रिकेट खेला है मैंने। मैं रणजी ट्रॉफी का एक मैच भी खेल चुका हूं। तब मैं बहुत अच्छा क्रिकेट प्लेयर हुआ करता था। मगर मुझे अभिनय के कीड़े ने काटा और मैं इस तरफ मुड़ गया। वैसे भी दो नावों की सवारी संभव नहीं थी। मुझे लगता है देश में जो क्रिकेट का माहौल है, उससे इस सीरीज को बहुत फायदा होगा। इससे पहले भी क्रिकेट पर जो सीरीज या फिल्में जैसे इनसाइड एज, लगान बहुत पसंद की जाती रही हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि क्रिकेट पर आधारित इस सीरीज से दर्शक जुड़ेंगे और सीरीज पसंद की जाएगी। ओटीटी न केवल दर्शक बल्कि बॉबी देओल, राहुल देव जैसे कई सीनियर एक्टर्स के लिए गेम चेंजर साबित हुआ, क्या आपको लगता है यह आपके धीमे करियर को रफ्तार देगा?ये सच है। बॉबी देओल तो ओटीटी पर छा ही गया। यहां सीनियर ही नहीं बल्कि कई नई प्रतिभाओं को भी मौका मिला। मुझे भी अपने करियर को लेकर कई उम्मीदें हैं कि हम जैसे सीनियर्स को इस प्लैटफॉर्म पर मनचाहा काम मिलेगा। मैं एक और वेब सीरीज कर रहा हूं। ओटीटी के विभिन्न प्लैटफॉर्म ने लॉकडाउन की मायूसी में न केवल दर्शकों को सहारा दिया बल्कि एक स्ट्रांग प्लैटफॉर्म बन कर भी उभरा, मगर आज मैंने थिएटर का रुख किया है। मैं सूर्यवंशी देख रहा हूं और साथ में मैंने ऑब्जर्व किया कि दर्शक सिनेमाघर में लौट रहे हैं। निर्देशक रोहित शेट्टी ने मासेज के लिए फिल्म बनाई है। जावेद जाफरी, गुलशन ग्रोवर और जैकी श्रॉफ जैसे सीनियर ऐक्टर्स का संयोजन उन्होंने अच्छा किया। मैं भी जल्द ही रोहित शेट्टी से मिलूंगा। मैं उनके साथ काम करना चाहता हूं। 'चंद्रकांता', 'युग', 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुलतान' जैसे भव्य शो हों या अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, रितिक रोशन जैसे बड़े स्टार्स, आपने सभी के साथ काम किया, फिर क्या वजह थी कि आपके करियर पर ब्रेक लग गया? इस मुद्दे पर किसी दिन फुर्सत से बैठकर दिल का हाल बयान करूंगा। मेरे साथ क्या और क्यों हुआ कि मैं वो चीजें नहीं कर पाया, जो मैं डिजर्व करता था। मैं तो इकबाल के उस शेर में यकीन करता हूं, सितारों से आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तिहान और भी हैं, तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा, तिरे सामने आसमां और भी हैं। भविष्य में दमदार रोल करने को बेताब हूं। आप जाने-माने क्लासिकल गायक उस्ताद आमिर खान साहब के बेटे हैं, मगर आपके पिता के निधन के बाद आपकी जिंदगी कितनी बदली? संघर्ष कैसा था?हर किसी को अपने सफर में संघर्ष से गुजरना पड़ता है। हमारे जमाने में संघर्ष करते हुए हम लोग सब्र से काम लिया करते थे। आज कल इंस्टंट और फास्ट फूड का दौर है, तो लोगों में पेशेंस भी कम है। वैसे लॉकडाउन में महामारी ने हमें काफी कुछ सिखाया है। मैं तो यही कहूंगा कि अपना काम मेहनत और ईमानदारी से करते जाइए। मुझे याद है अमरीश पुरी साहब (जाने-माने अभिनेता) ने मुझसे कहा था, हमेशा अपने आप को फिट रखो, मेरा करियर 54 साल की उम्र में शुरू हुआ था और वो तभी संभव हो पाया, क्योंकि मैं फिट था। देखिए, मैं उस वक्त 7 साल का था और मेरे वालिद की कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। मेरे वालिद का बहुत बड़ा नाम था। वो पद्म भूषण थे, उन्हें संगीत अकादमी अवॉर्ड भी मिल चुका था। मगर उस हादसे ने उन्हें हमसे छीन लिया। उसके बाद हमारी जिंदगी पहले जैसी कभी नहीं रही। उसके बाद मेरी वालिदा और मैंने बहुत जो मुश्किल दौर देखा, उसे मैं जीवन का आधार स्तंभ मानता हूं। आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी वालिदा की वजह से हूं। मुझे याद है नागपुर के सेंटर पॉइंट होटल के फ्रंट ऑफिस में काम किया करता था मैं। जब बार एरिया में कोई नहीं होता था, तब बार टेंडर की नौकरी भी कर लेता था। तब महीने के हजार-बारह सौ मिलते थे, मगर वो भी बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। मुझे भी अपने हिस्से का संघर्ष करना पड़ा, मगर 'द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुलतान' में मुझे ब्रेक मिला और मेरी जिंदगी बदल गई। कुछ अरसा पहले आप छेड़खानी जैसे आरोपों के विवादों में भी रहे? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?आप उसी विवाद की बात कर रही हैं न जो मेरी बच्ची से जुड़ा था। मैंने उस बात का खुलासा कर दिया था। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे। देखिए, इंसान अपने ऊपर दुख-तकलीफ बर्दाश्त कर सकता है, मगर अपनी औलाद पर जरा-सी भी खराश आ जाए तो बर्दाश्त नहीं होता। मेरी बेटी के लिए मुझे आगे आना पड़ा। उसे प्रताड़ित किया गया। मैंने यही सीखा कि हमें हर हाल में अपने बच्चों के लिए खड़ा होना चाहिए। मैं तो हर मां-बाप से यही कहूंगा कि मुश्किल हो या तकलीफ अपने बच्चों का साथ जरूर दें।


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